गम्हरिया। नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर के बीएससी (ऑनर्स) कृषि के विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ खेत और किसानों की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने की पहल की गई है। कृषि विज्ञान केंद्र में गुरुवार को रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस प्रोग्राम (आरएडब्ल्यूईपी) के तहत ओरिएंटेशन सह उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसका शुभारंभ वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. पंकज सेठ ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के उद्देश्य, गतिविधियों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। एक माह तक चलने वाले कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 10 विद्यार्थी कृषि विज्ञान केंद्र में रहकर ग्रामीण क्षेत्र में कृषि की व्यवहारिक जानकारी हासिल करेंगे। इस दौरान वे किसानों की समस्याओं, जरूरतों, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को करीब से समझेंगे। तकनीकी ज्ञान के साथ संचार कौशल पर जोर कार्यक्रम में कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉ. अमरेश चंद्र पांडे, पौधा संरक्षण वैज्ञानिक गोन्दरा मार्डी, पौधा प्रजनन वैज्ञानिक एलिसामी बारवा और कार्यक्रम सहायक डॉ. लीली मैक्सिमा किस्पोट्टा ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने किसानों से संवाद स्थापित करने, उनकी समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए व्यवहारिक व संचार कौशल विकसित करने पर जोर दिया। गांवों में पीआरए टूल्स से करेंगे अध्ययन प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थी सरायकेला-खरसावां जिले के विभिन्न गांवों का भ्रमण करेंगे। ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने के लिए पार्टिसिपेटरी रूरल अप्रेजल (पीआरए) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। इसके तहत सामाजिक व संसाधन मानचित्रण, खेत भ्रमण, मौसमी कैलेंडर, वेन आरेख, समस्या प्राथमिकता निर्धारण, मैट्रिक्स रैंकिंग और समूह चर्चा जैसी गतिविधियां की जाएंगी। डॉ. पंकज सेठ ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की समस्याओं के स्थानीय और वैज्ञानिक समाधान तलाशने के साथ विद्यार्थियों को कृषि विभाग व ग्रामीण संस्थाओं की कार्यप्रणाली से परिचित कराना है।
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के वी के का अनोखा पहल, खेतों से जुड़कर कृषि की पढ़ाई करेंगे विद्यार्थी
नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर के बीएससी (ऑनर्स) कृषि के विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ खेत और किसानों की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने की पहल की गई है।
लेखक: संवाददाता · 1 अक्टूबर 2026
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